बुधवार, 23 फ़रवरी 2011

दिल से  आवाज़ ये आई है 
शब्दों से नवाजो तो बस रुबाई है .
तुम खुद को बुलंदी का अक्स दे दो 
समझो इसे , खुदा की खुदाई है ! 
मेरे हमदम, मेरे एहसास को 
परवान तो चढ़ जाने दो 
रुहे-इबादत को
अंजाम तक पहुँचाने  दो
नज़्म तो खुद-ब-खुद 
ऊंचाई छू लेगा 
बस ,अपने होठों से इसे ,
गुनगुनाने दो !

11 टिप्‍पणियां:

  1. aapka blog kal charchamanch par hoga ..aap vahan aayen aur apne vicharon se anugrahit kijiye ... saadar

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  2. अति सुंदर भावपूर्ण अभिव्यक्ति .

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  3. बहुत सुन्दर भावपूर्ण प्रस्तुति..

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  4. रुहे-इबादत को
    अंजाम तक पहुँचाने दो
    नज़्म तो खुद-ब-खुद
    ऊंचाई छू लेगा ...

    बहुत सुन्दर.....एक-एक शब्द भावपूर्ण...

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  5. सुन्दर रचना...
    बहुत दिनों बात पढने को मिला इस तरह का
    बधाई....
    ..............................
    आशुतोष की कलम से.
    हिंदी कविता-कुछ अनकही कुछ विस्मृत स्मृतियाँ

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  6. बहुत सुन्दर भावपूर्ण प्रस्तुति|

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  7. "shbdon se navaazo to bas rubaai hai ..."
    khoobsoorat nzm -badhaai .
    veerubhai .

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  8. नज़्म तो खुद-ब-खुद
    ऊंचाई छू लेगा
    बस ,अपने होठों से इसे ,
    गुनगुनाने दो !

    बहुत खूब !!

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  9. बहुत सुन्दर...

    http://shayaridays.blogspot.com

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